एक नीली साबुन _बट्टी
वह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी का
बहुप्रचारित साबुन है
दुखियारी महतारी गंगा
उसका जी डरता है भय से
उसकी प्रतिद्वंद्वी हथेली _ भर की वह
जो साबुन की टिकिया है
इजारेदार पूंजीवाद की बिटिया है
उसका महाबली झाग उठने से पहले
गंगा के दिल मे हौल उठता है
ज्ञानेद्रपति
वह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी का
बहुप्रचारित साबुन है
दुखियारी महतारी गंगा
उसका जी डरता है भय से
उसकी प्रतिद्वंद्वी हथेली _ भर की वह
जो साबुन की टिकिया है
इजारेदार पूंजीवाद की बिटिया है
उसका महाबली झाग उठने से पहले
गंगा के दिल मे हौल उठता है
ज्ञानेद्रपति